वर्ल्डकप डायरी – 1975 से लेकर अब तक भारत का सफर

नमस्कार दोस्तों, क्रिकेट की शुरुआत तो काफ़ी पहले ही हो चुकी थी, लेकिन वनडे वर्ल्डकप का आगाज़ सन् 1975 से हुआ। इसके बाद से अब तक कुल मिलाकर 11 वनडे वर्ल्डकप हो चुके हैं। आज हम आपको 1975 से लेकर अब तक हुए 11 वर्ल्डकप में भारत के प्रदर्शन के बारें में बतायेंगे। इन 11 वर्ल्डकप के 43 साल के सफर में भारत को 2 बार विश्वविजेता बनने का मौका मिला।
बात करें 1975 में हुए पहले वर्ल्डकप की तो भारत इस वर्ल्डकप में ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गयी थी। इस वर्ल्डकप में खेले गए 3 मैचों में से भारत को 2 में हार का सामना करना पड़ा था और 1 मैच में जीत हासिल हुई थी। इस वर्ल्डकप में भारत के कप्तान श्रीनिवासराघवन वेंकटराघवन थे।
सन् 1979 में हुए वर्ल्डकप में भी भारत का सफर ग्रुप स्टेज पर ही ख़त्म हो गया था। और भारत इस वर्ल्डकप में खेले गए अपने तीनों मैच हार गया था। ये अब तक के 11 वर्ल्डकप में से एकमात्र ऐसा वर्ल्डकप हैं जिसमें भारत को एक भी जीत नसीब नहीं हुई थी। इस बार भी कप्तान श्रीनिवासराघवन वेंकटराघवन ही थे।
सन् 1983 में हुए तीसरे वनडे वर्ल्डकप ने पुरे विश्व जगत में भारतीय क्रिकेट टीम का नाम कर दिया था। ये वही वर्ल्डकप था जिसमें भारत को पहली बार विश्वविजेता का ख़िताब हासिल हुआ था। इस बार टीम की कमान कपिल देव के हाथों में थी।
इसके बाद 1987 में हुए वर्ल्डकप में भारत का प्रदर्शन मिलाझुला रहा था। इस बार टीम ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था। इस वर्ल्डकप में भारत को 7 मैच में से 5 में जीत मिली थी और 2 मैच में हार का सामना करना पड़ा था। इस बार भी कप्तान कपिल देव ही थे।
1992 में हुए वर्ल्डकप में भी भारत का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। इस बार भी टीम कुछ खास नहीं कर पाई थी। और अपने खेले गए 8 मैच में से 5 मैच हार गयी थी। टीम को 2 मैच में जीत मिली। इस बार कप्तानी का दारोमदार मोहम्मद अज़रूदीन पर था।
1996 के वर्ल्डकप के लिये भी भारतीय टीम की कप्तानी मोहम्मद अज़रूदीन को ही सौंपी गई थी। इस बार टीम ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था। और टीम 7 में से 4 मैच जीती और 3 मैच हार गई थी।
1999 के 50-50 वर्ल्डकप में भारतीय टीम का प्रदर्शन भी 50-50 ही रहा था। इस वर्ल्डकप में भारत द्वारा खेले गए 8 मैच में से उसे 4 में जीत मिली और 4 मैच में हार। और टीम ने सुपर सिक्स तक अपना कदम बढ़ाया था। और कप्तान इस बार भी मोहम्मद अज़रूदीन ही थे।
20वीं सदी में 2003 में हुए पहले वर्ल्डकप में भारत का सफर शानदार रहा। और टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया, लेकिन फाइनल में उसे ऑस्ट्रेलिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इस बार कप्तान सौरव गांगुली थे। और भारत ने इस बार अपने 11 मैच में से 9 में जीत हासिल की थी।
और 2007 में हुए वर्ल्डकप में भारतीय टीम को उलटफेर का शिकार होना पड़ा था। और टीम बांग्लादेश से हारकर ग्रुप स्टेज में ही बाहर हो गई थी। टीम ने अपने 3 में से 2 मैच गवाएं थे। इस बार टीम की कमान राहुल द्रविड़ के हाथों में थी।
और फिर आया 2011 का वर्ल्डकप और भारत के क्रिकेट इतिहास का सबसे यादगार वर्ल्डकप। क्योंकि इस बार फिर भारत 28 साल वर्ल्डकप की ट्रॉफी जीतने में कामयाब हुआ था। महेंद्र सिंह धोनी ने अपनी कप्तानी में अपनी ही धरती पर फाइनल में छक्का लगाकर भारत को वर्ल्डकप जितवाया था। हालांकि इस वर्ल्डकप में भी भारत को 1 मैच में हार सामना करना पड़ा था और एक मैच टाई हुआ था।
2015 के वर्ल्डकप में कमान एक बार फिर महेंद्र सिंह धोनी के हाथों में ही थी। लेकिन टीम इस बार सेमीफाइनल का सफर ही तय कर पाई थी। टीम इस बार खेले गए 8 में से सिर्फ एक ही मैच हारी और वो था सेमीफाइनल।
अब बारी हैं वर्ल्डकप 2019 की, अब देखना हैं कि इस बार कौनसा कप्तान अपनी टीम को वर्ल्डकप की ट्रॉफी दिलवाएगा। अब आप हमें कमेंट में ज़रूर बताये कि इस बार कौनसी टीम विश्वविजेता बनेगी?

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